जितना भी चाहता हूं, सब मिल ही जाता है, अब दुख किस बात का ॽ
फसाने
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मुक्तक (१२२२ × ४)
दिलों की हलचलें समझो,जरा तुम प्यार तो कर लो, बढ़ी है धड़कने सुन लो, जरा इजहार तो कर लो, वही अब बन गई है जिन्दगी की हमसफर मेरी, फसाने प्रेम के मेरे, सही स्वीकार तो कर लो|
[18/04 1:52 PM] Rahul Shukla: [20/03 23:13] अंजलि शीलू: स्वर का नवा व अंतिम भेद १. *संवृत्त* - मुँह का कम खुलना। उदाहरण - इ, ई, उ, ऊ, ऋ २. *अर्ध संवृत*- कम मुँह खुलने पर निकलने वाले स्वर। उदाहरण - ए, ओ ३. *विवृत्त* - मुँह गुफा जैस...
कुल उच्चारण स्थान ~ ८ (आठ) हैं ~ १. कण्ठ~ गले पर सामने की ओर उभरा हुआ भाग (मणि) २. तालु~ जीभ के ठीक ऊपर वाला गहरा भाग ३. मूर्धा~ तालु के ऊपरी भाग से लेकर ऊपर के दाँतों तक ४. दन्त~ ये जानते ही ...
विसर्ग सन्धि ~ अर्थात् ~ : + स्वर = विसर्ग संधि : + व्यंजन = विसर्ग संधि (1) पहला नियम ~ विसर्ग पूर्व में स्वर अ हो पीछे य ,र ,व और ह हो, या वर्ण वर्ग का 3 से 5 हो तो विसर्ग युत अ ...
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