रंगी छन्द (212 2)

    रंगी छंद ∆
विधान-रगण गुरु  ( 212  2 )

खोल  तारा|
भेद   सारा||
बोल भी दो|
मोल भी दो||

प्रेम     मेरा|
है     सवेरा||
ओज भी दो|
खोज भी दो||

रात  न्यारी|
बात प्यारी||
बोल भी दो|
तोल भी दो||

संग   गाओ|
संग खाओ||
मीत  तू  है|
प्रीत तू  है||

साधना  दो|
धारणा  दो||
भावना  दो|
कामना दो||

कामिनी तू|
दामिनी तू||
यामिनी  तू|
भामिनी तू||

जीत  है  तू|
गीत  है  तू||
धन्य  है  तू|
दिव्य है तू||

मालिनी  तू|
शालिनी  तू||
धामिनी  तू|
गामिनी तू||

© डॉ० राहुल शुक्ल 'साहिल'

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