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शब्दों में बसी कहानी

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शब्दों में बसी कहानी तुम दिल की कहानी बनी आज ऐसे, हर अक्षर को मैंने तपाकर लिखा। हर शब्द को मैंने समझकर लिखा, जो सही था, उसे सँजोकर लिखा, भावनाओं का सागर लहर बन गया, हर जज़्बात मेरा शहर बन गया, दर्द की स्याही से लफ्ज़ जो निकले, वो कागज़ पे बिखरा असर बन गया। वादों की रोशनी पर दीप जल रहे, यादों के सितारे भी साथ चल रहे, चाँद की रोशनी में चमकता चेहरा, उस चेहरे का नूर, संग हर-पल रहे। हर लम्हा वो यादों में ढलता रहा, जैसे साया कोई साथ चलता रहा, तेरी बातों की गर्मी, तेरी साँस की खुशबू, दिल की वीरानी में गुल खिलता रहा। © डॉ. राहुल शुक्ल साहिल #शब्दों_की_तपिश #यादों_की_रोशनी #दिल_की_कहानी  #स्याही_के_आँसू #भावनाओं_का_सागर #वादा_याद_और_रोशनी #तेरी_यादों_का_नूर #शब्दों_में_बसी_कहानी #धड़कनोंकीदास्तान #तुम_और_मेरी_कविता #डाॅराहुलशुक्लसाहिल

नवरात्रि व्रत (भारतीय सनातनी संस्कृति)

नवरात्रि व्रत का आध्यात्मिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण: नवरात्रि हिन्दू सनातन संस्कृति का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो विशेष रूप से माता दुर्गा की पूजा के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व भारतीय कैलेंडर के अनुसार साल में दो बार आता है—चैत्र मास (मार्च/अप्रैल) और आश्विन मास (सितंबर/अक्टूबर) में। नवरात्रि का अर्थ है ‘नौ रातें’, जो विशेष रूप से शक्ति की उपासना और आत्मसाक्षात्कार के लिए होती हैं। नवरात्रि का व्रत आत्मिक शुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति की ओर एक कदम बढ़ने का अवसर प्रदान करता है। आध्यात्मिक दृष्टिकोण: शक्ति पूजा : नवरात्रि का पर्व देवी दुर्गा की पूजा का प्रतीक है, जो शक्ति, संतुलन, और सकारात्मकता की देवी मानी जाती हैं। इन नौ दिनों में विशेष रूप से उनके नौ रूपों की पूजा की जाती है—शैलपुत्री, ब्राह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, और सिद्धिदात्री। इन रूपों के माध्यम से भक्तों को मानसिक और शारीरिक शक्ति मिलती है। आध्यात्मिक साधना : नवरात्रि के दौरान उपवासी रहकर, श्रद्धालु देवी की पूजा और जाप करते हैं। यह समय व्यक्ति को मानसिक शांति, आंतरिक संतु...

सुनीता विलियम्स की गौरव गाथा

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सुनीता विलियम्स की गौरव गाथा सपनों को जो सच कर जाए, कठिन डगर भी कट जाए। साहस, धैर्य, निरंतरता, मंज़िल पर ले जाए॥ नव माह अंतरिक्ष में रहकर, फिर धरती पर लौटी वीरांगना। संघर्षों की कठिन राहों को, साहस से जीती ये साधना॥ शून्य गुरुत्व पर पाती खाकर, खुद को जिसने जीवित रखा। श्रम, विज्ञान, लगन से फहराया, अन्वेषण का तिरंगा प्यारा॥ भारत की इस बेटी पर, हर भारतवासी को अभिमान। संघर्षों से सीख मिली हमें, हो आत्मबल तो हो आसमान॥ ©डॉ. राहुल शुक्ल 'साहिल'

हर पल दिल-ओ-जान से चाहा बहुत

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हर पल दिल-ओ-जान से चाहा बहुत हर पल दिल-ओ-जान से चाहा बहुत, तेरे हर निशां को सराहा बहुत। ज़िन्दगी के सबक थे कठिन इस कदर, हर कठिन दौर को मैं निभाता रहा। जो सहारा बने थे किसी दौर में, उनके साये भी अब डगमगाने लगे। जिन्हें मंज़िल समझकर चले थे कभी, वो ही राहों में दर्पण दिखाने लगे। साथ तेरा सदा ही सुहाना लगा, मैं हर एक रिश्ता निभाता रहा। धार में कर्म की जो खड़ा रह गया, वो ही  साहिल से टकराता रहा। कभी संगठन की मिसालें बने, कभी बुझते चरागों को रोशन किया। पर ज़माने की तेज़ आंधियों में, खुद को हर रोज़ खोता ही जाता रहा। © डॉ. राहुल शुक्ल 'साहिल'

है दिल में कहीं

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है दिल में कहीं है दिल में कहीं, एक टूटा सा सपना, बिखरी हुई यादों का चुपचाप रिश्ता। तेरी बातों की खुशबू, अब भी है बाकी, सांसों में घुलती, अधूरी सी बाती। राहों में बिछे, कुछ अफसाने पुराने, तेरे नाम लिखे थे, अब धुंधले ठिकाने। आवाज़ें बुलाती हैं, खामोशियों से, पर दिल कह रहा है, न जा उन गलीयों से। है दिल में कहीं, एक उलझा फ़साना, मगर फिर भी तेरा, है नाम पुराना। © डॉ. राहुल शुक्ल 'साहिल'

बेरहम सजनी

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बेरहम सजनी बेरहम सजनी, बेमुरव्वत तेरी अदा, हर लफ्ज़ में छलका, बेवफाई का नशा। बेदर्द तेरी आँखें, क्यों छलनी करें, हर ख्वाब को मेरे, क्यों वीरान करें? बेरूखी का अंदाज़, कातिल सा लगे, तेरे हर वार से, दिल सहमा रहे। बैरी तेरा व्यवहार, जीना दुश्वार, फिर भी तेरा नाम, लब पे हर बार। हमने तो चाहा था, तुझसे वफ़ा, तूने सिखा दी, बस बेवफाई की अदा। अब तुझसे कोई गिला भी नहीं, बस यादें तेरी, हैं दिल में कहीं। © डॉ. राहुल शुक्ल 'साहिल'

तीर्थराज की जय/ महाकुंभ की जय

तीर्थराज की जय  महाकुंभ की जय प्रयागराज की जय मां गंगा की जय । आस्था का संगम प्रेम  की  त्रिवेणी  उच्चता की श्रेणी  शुद्ध जहां विचार। मन  का  मनुहार  स्नेह और सत्कार  मोक्षदायिनी मां गंगा समय की काल गंगा। ज्ञानदायिनी हंसवाहिनी  पापनाशिनी  देवी  सबका करें उद्धार महाकुंभ  का पर्व। शुभता अरु गन्धर्व तीर्थ राज की जय  महाकुंभ की जय प्रयागराज की जय। मां  गंगा की जय ।। ©️ डॉ. राहुल शुक्ल 'साहिल'