ताबीर



देखे थे सपने,
वो पूरे हो रहे हैं,
हर मुकाम पर अपने,
सब आगे बढ़ रहे हैं।

आँखों में जो कल तक
सपने सज रहे थे,
मेहनत के दम पर अब
उनकी ताबीर बन रही है।

जो करते हैं कर्म,
और थकते नहीं हैं,
उनकी राहों में फलक की
तस्वीर बन रही है।

जिनको है दुनियावी
समझदारी की समझ,
उनके हाथों में अब
नई तक़दीर बन रही है।

© डॉ. राहुल शुक्ल साहिल

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