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Showing posts from June, 2026

जो देखे थे सपने

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 जो देखे थे सपने जो देखे  थे  सपने, वो  पूरे  हो  रहे  हैं, हर मुकाम पर अपने, सब  आगे बढ़  रहे हैं । आंखों में जो कल तक सपने  सज  रहे  थे, मेहनत के दम पर अब उनकी ताबीर बन रही है। जो   करते  हैं  कर्म, और  थकते  नहीं  हैं, उनकी राहों में फलक की तस्वीर  बन   रही  है । जिनको  है  दुनियावी समझदारी की समझ, उनके  हाथों  में  अब नई तक़दीर बन रही है । जो देखे  थे  सपने, वो  पूरे   हो  रहे  है, हर मुकाम पर अपने, सब  आगे  बढ़ रहे  हैं । हौसलों  की  रोशनी,  हर दिल में जग रही है, सच की इस मेहनत से  दुनिया  संवर  रही  है । मेहनत की इस राह में, रोशनी  उतर  रही  है, जो चलते  है सच  पर, उनकी  जीत बन‌ रही है । © डॉ. राहुल शुक्ल साहिल

ताबीर

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देखे थे सपने, वो पूरे हो रहे हैं, हर मुकाम पर अपने, सब आगे बढ़ रहे हैं। आँखों में जो कल तक सपने सज रहे थे, मेहनत के दम पर अब उनकी ताबीर बन रही है। जो करते हैं कर्म, और थकते नहीं हैं, उनकी राहों में फलक की तस्वीर बन रही है। जिनको है दुनियावी समझदारी की समझ, उनके हाथों में अब नई तक़दीर बन रही है। © डॉ. राहुल शुक्ल साहिल

एक पौधा एक संकल्प

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       🌿 एक पौधा, एक संकल्प 🌿 सकल धरा सुंदर बने, पौधे हों चहुँ ओर। मिलकर संरक्षण करें, सुखमय होगा भोर॥ धरती माँ का यह संदेश, रखना प्रकृति का ध्यान विशेष। पेड़  लगाओ, धरा  बचाओ, हो  हरियाली चहुँ ओर। स्वच्छ, सुंदर वातावरण से, महके जीवन का  हर छोर। नदियाँ निर्मल, वन हरियाले, जीवन  में चहुँ ओर उजाले। पक्षी  गाएँ  मधुर तराने, खुशहाली के नए तराने। स्वच्छ हवा का हो अधिकार, यही प्रकृति का है उपहार। जल, जंगल और ज़मीन बचाएँ, आने  वाला  कल  मुस्कुराएँ। मिलकर धरती  को  सजाएँ, एक  पौधा  हम  सभी लगाएँ। हरित भविष्य का स्वप्न सजाएँ, आओ  मिलकर  उसे बनाएँ। "हर  घर  एक  पौधा  हो, धरती का फिर सौंदर्य हो। © डॉ. राहुल शुक्ल साहिल