जो देखे थे सपने

 जो देखे थे सपने

जो देखे  थे  सपने,
वो  पूरे  हो  रहे  हैं,
हर मुकाम पर अपने,
सब  आगे बढ़  रहे हैं ।

आँखों में जो कल तक
सपने  सज  रहे  थे,
मेहनत के दम पर अब
उनकी ताबीर बन रही है।

जो   करते  हैं  कर्म,
और  थकते  नहीं  हैं,
उनकी राहों में फलक की
तस्वीर  बन   रही  है ।

जिनको  है  दुनियावी
समझदारी की समझ,
उनके  हाथों  में  अब
नई तक़दीर बन रही है ।

जो देखे  थे  सपने,
वो  पूरे   हो  रहे  है,
हर मुकाम पर अपने,
सब  आगे  बढ़ रहे  हैं ।

हौसलों  की  रोशनी, 
हर दिल में जग रही है,
सच की इस मेहनत से 
दुनिया  संवर  रही  है ।

मेहनत की इस राह में,
रोशनी  उतर  रही  है,
जो चलते  है सच  पर,
उनकी  जीत बन‌ रही है ।

© डॉ. राहुल शुक्ल साहिल

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