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योग का महत्व

योग क्या है ? योग शब्द की उत्पत्ति संस्कृत शब्द युज से है जिसका अर्थ है जुड़ना, एकजुट करना या एकीकृत करना| समस्त इन्द्रियों की स्थिर अवस्था ही योग है| व्यावहारिक स्तर पर, योग श...

मुक्तक (सात जनम)

2112  2112  22 जो  कुछ  माँगा सबकुछ पाया, जीवन  की   है  अद्भुत  माया, सांझ  - सवेरे   प्रतिपल   तेरा, संग   रहेगा   हरदम    साया| ©️ डाॅ• राहुल शुक्ल साहिल

गीत (शृंगार)

गीत शृंगार  लिखूँ  मैं  मेरे मन का, अपने भावों के अन्तर्मन का| फूलों   की   खुशबू   फैलाती, मधुर- मधुर अहसास जगाती| जीवन में खुशियाँ भर जाएँ, जब  पग  तेरे  घर  में आएँ| बाँह   प...

घनाक्षरी (भोलेनाथ)/ गान होना चाहिए

🎍🌺🎍🌺🎍🌺🎍🌺🎍🌺🎍       मनहरण  घनाक्षरी {8 8 8 7  प्रति चरण यति, चार चरण समतुकान्त} शब्द - शब्द की पुकार, सुर  ताल  बने  हार, भक्ति  भाव  प्रेम  रस, साधना  दिखाइए| छन्द - छन्द काव्य  रंग, तन - मन  प्रीत  संग, दिव्य  रूप  दर्शन  की, कामना जगाइए| माया  लोभ दु:ख तज, नित्य देव  गुन  भज, काम  क्रोध वासना को, मूल से भगाइए| देवों  में   उत्तम  देव, भोलेनाथ  महादेव,  मुक्ति  मार्ग  मोक्ष  पथ,  हमें   दिख  लाइए|| ©️ डॉ• राहुल शुक्ल साहिल घनाक्षरी प्रात काल सूरज का, हृदय  में धीरज का, मात- पिता गुरु देव, मान होना चाहिए | मन में  विचार शुद्ध, आचरण हो विशुद्ध, प्रेममयी भाव जैसा, ज्ञान   होना  चाहिए | भूमि व्योम को नमन, भक्ति भाव की लगन, जगदाता  का  सदैव, भान  होना  चाहिए | कर्मरत    रहे   तन, स्नेह से भरा हो मन, सुन्दर श...

Prayer of Sanjivani Welfare Society (Self financed non government organization)

🙏 ```SANJIVANI PLEDGE``` 🙏 By taking the nature of Almighty as a witness, we resolve to maintain the best health of ourselves and everyone.   We will suggest measures to keep ourselves and other needy beings from disease. We will keep trying to provide complete health to all human beings in India through all types of medical disciplines. Sanjivani family will always respect their families, elders and Gurus and will always take inspiration from their ideals. भावार्थ ~ सर्वशक्तिमान प्रकृति को साक्षी मानकर हम अपने एवं सभी के उत्तम स्वास्थ्य को ब...

अनुशासन

             त्रिपदिक जनक छंद संस्कृत के प्राचीन त्रिपदिक छंदों (गायत्री, ककुप आदि) की तरह जनक छंद में भी ३ पद (पंक्तियाँ) होती हैं. दोहा के विषम (प्रथम, तृतीय) पद की तीन आवृत्तियों से जनक छंद बनता है. प्रत्येक पद में १३ मात्राएँ तथा पदांत में लघु गुरु या लघु लघु लघु होना आवश्यक है. पदांत में सम तुकांतता से इसकी सरसता तथा गेयता में वृद्धि होती है. प्रत्येक पद दोहा या शे'र की तरह आपने आप में स्वतंत्र होता है . जनक छंद की बात की जाए तो इसके पाँच भेद हैं🌺💐💐👌 1- शुद्ध जनक छंद - जहाँ पहले और अंतिम पद की तुक मिले। 2- पूर्व  जनक  छंद- पहले दो पद तुकांत 3- उत्तर जनक छंद- अंत के दो पद तुकांत 4- घन  जनक छंद - तीनों पद तुकांत 5- सरल जनक छंद- तीनों पद अतुकांत। राम नाम  ही सार है राम राम  कहते रहो समझो नौका पार है       ~शैलेन्द्र खरे "सोम" 🌷💐🌷💐🌷💐🌷🌷 1- शुद्ध जनक छंद - जहाँ पहले और अंतिम पद की तुक मिले। तारा नयन कमाल है| सुन्दर सूरत देखकर| बिगड़ा  मेरा हाल है| ================= 2- ...

रमेश छन्द (डॉ० राहुल शुक्ल 'साहिल')

     🎍रमेश छंद🎍 विधान~ [नगण यगण नगण जगण] ( 111  122  111  121 ) 12 वर्ण, 4 चरण [दो-दो चरण समतुकांत] मुदमय  तारा  मधुरिम  रूप| प्रियतम है तू  सुखद अनूप|| तन - मन चाहे प्रतिपल नेह| हृदय  बसा है सुरमय स्नेह|| ©डॉ० राहुल शुक्ल 'साहिल'