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सरस्वती वंदना (अखिल कुमार मिश्रा)

1965 मे आयी एक भारतीय सिनेमा (खानदान) के एक बहुचर्चीत गीत "तुम्ही मेरी मंदिर,तुम्ही मेरी पूजा" के तर्ज पर एक श्याम भजन का प्रयास:-                ||जय श्री श्याम|| मेरे साँवरे तेरा मन्...

दोहे (डॉ० राहुल शुक्ल 'साहिल')

24/07/2018 को रचित दोहे रचनाकार~ डॉ० राहुल शुक्ल 'साहिल' शब्द सृजन संसार है, शब्द वर्ण का  मेल| अलंकार सर्जन सजे, सुर लय साजे खेल|| कविता मेरी कह रही, करुण कमल की गाथ| पल-पल पल्लव बोलते, कवित...

शुभमाल छन्द

🌹 शुभमाल छंद 🌹 विधान ~ [ जगण  जगण ] ( 121    121 ) , दो - दो चरण तुकान्त , 6 वर्ण प्रति चरण सुनो  मनुहार| कहो जयकार|| बसे मन काम| जपो गुन राम|| © डॉ० राहुल शुक्ल 'साहिल'

मकरंद छन्द (डॉ० राहुल शुक्ल 'साहिल')

     🌺 मकरन्द छंद 🌺 विधान~ [ नगण यगण नगण यगण नगण नगण नगण नगण गुरु गुरु] (111122,111122,11111111,111122) 26 वर्ण,4 चरण,यति 6,6,8,6,वर्णों पर दो-दो चरण समतुकांत] सुखद सहारा, तन मन हारा, प्रतिपल सँवरत, प्रियवर पाऊँ| नयन स...

मलयज छन्द 'साहिल'

◆मलयज छंद◆ शिल्प- 8 लघु प्रति चरण चार चरण समतुकांत। पल - पल मुदमय| मम जग सुखमय|| पहर - पहर   गुन| हृदय  बहर  सुन|| मिलन सहन धुन| जतन  गहन चुन|| तुम हिय  हलचल| सुर लय बल चल|| अधर  कमल सम| मधुर...

दीप छंद 'साहिल'

    🌻 दीप छंद 🌻 शिल्प~ प्रति चरण 10 मात्राएँ , परन्तु अंतिम पाँच मात्राएँ क्रमशः नगण गुरु लघु(11121), चार चरण समतुकांत। गुरु के वचन भाय| जीवन सुधर जाय|| गुरु का सुगढ़ ज्ञान| भज लो परम म...

वंशस्थ छंद (डॉ० राहुल शुक्ल 'साहिल')

     वंशस्थ छंद [ जगण तगण जगण रगण] (121   221   121  212) 12वर्ण,4 चरण दो-दो चरण समतुकांत] विचार अच्छे  हिय में  सदा रहे| अमोल बोली मुख से सदा कहे|| विकार सारे मन से निकालिए| समाज पूरा मिल के सँवारि...