🎍🌺🎍🌺🎍🌺🎍🌺🎍🌺🎍 मनहरण घनाक्षरी {8 8 8 7 प्रति चरण यति, चार चरण समतुकान्त} शब्द - शब्द की पुकार, सुर ताल बने हार, भक्ति भाव प्रेम रस, साधना दिखाइए| छन्द - छन्द काव्य रंग, तन - मन प्रीत संग, दिव्य रूप दर्शन की, कामना जगाइए| माया लोभ दु:ख तज, नित्य देव गुन भज, काम क्रोध वासना को, मूल से भगाइए| देवों में उत्तम देव, भोलेनाथ महादेव, मुक्ति मार्ग मोक्ष पथ, हमें दिख लाइए|| ©️ डॉ• राहुल शुक्ल साहिल घनाक्षरी प्रात काल सूरज का, हृदय में धीरज का, मात- पिता गुरु देव, मान होना चाहिए | मन में विचार शुद्ध, आचरण हो विशुद्ध, प्रेममयी भाव जैसा, ज्ञान होना चाहिए | भूमि व्योम को नमन, भक्ति भाव की लगन, जगदाता का सदैव, भान होना चाहिए | कर्मरत रहे तन, स्नेह से भरा हो मन, सुन्दर श...