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खूबसूरत शाम

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              खूबसूरत शाम  नाराज़गी की भी कोई ख़ूबसूरत शाम होने दो, उल्फ़त को मोहब्बत का मुकम्मल अंजाम होने दो। इससे–उससे, जाने किस–किस से मिले हैं रास्ते, हर किसी से मुहब्बत का कोई नाम होने दो। जो मिला है दर्द, उसे भी कोई पैग़ाम समझो, हर एक ज़ख़्म को आज दिल का पैग़ाम होने दो। बिछड़ कर भी जो महके, वही रिश्ता है असल, यादों को भी कुछ लम्हों का अरमान होने दो। हमने सीखा है सहना भी मुस्कुराकर यहाँ, हर इक शिकवा–गिला अब बे-ज़ुबान होने दो। “साहिल” तजुर्बों से ही मुकम्मल हुआ है इश्क़, हर अंजाम को आख़िर एक शाम होने दो ।।    © डॉ. राहुल शुक्ल साहिल

ग़ज़ल

ग़ज़ल  पुराने ग़म को दिल से आज उतारो यारो, नया सवेरा है, ख़ुद को सँवारो यारो। जो बीत गया, उसे सब्र का नाम दे दो, नव वर्ष आया है, दीप जला दो यारो। थकी हुई साँसों को थोड़ा सा विश्वास दो, टूटे ख़्वाबों में फिर रंग निखारो यारो। नफ़रतों की ये दीवार अब गिरनी चाहिए, मुहब्बत से ज़माने को पुकारो यारो। अँधेरों ने बहुत दिन हमें बाँधे रखा, अब उजालों से रिश्ता सुधारो यारो। साहिल की मंज़िल ये आख़िरी नहीं है, उम्मीद की कश्ती को बहने दो यारो। © डॉ. राहुल शुक्ल साहिल

प्राकृतिक सन्देश

      प्राकृतिक सन्देश दीपक की लौ में भी संघर्ष लिखे जाते हैं, रात की ख़ामोशी में उत्कर्ष लिखे जाते हैं, जो सीख ले मुश्किलों से निकलकर चलना, उनके जीवन-पृष्ठों पर सुख–हर्ष लिखे जाते हैं। हवाओं की सरसराहट में भी संवाद होते हैं, पेड़-पौधों के भी आपस में वाद होते हैं, जो सुन सके प्रकृति के मौन की गूढ़ भाषा, उनकी हर आहट में सुकून भरे नाद होते हैं। पेड़ों की छाँह में भी उपदेश बसते हैं, माटी की ख़ुशबू में गहरे संदेश रचते हैं, जो समझ सके प्रकृति के सौंदर्य की प्रेरणा, उनके जीवन में सुंदर परिवेश सजते हैं। नदियों की धार में भी इकरार बहते हैं, पत्थर की चुप्पी में भी स्वीकार रहते हैं, जो मौन की भाषा को हृदय से समझ पाए, क्योंकि ख़ामोशी में ही सच्चे संवाद रहते हैं। पंछी की चूँ - चूँ में भी अल्फ़ाज़ होते हैं, बिन शब्दों के भी बोली के साज़ होते हैं, ये प्राणी अकसर इंसानों से अच्छे होते हैं, उनकी ख़ामोशी में ख़्वाबों के परवाज़ होते हैं। © डॉ• राहुल शुक्ल ‘साहिल’

विश्व हिन्दी दिवस पर विशेष

विश्व हिन्दी दिवस पर विशेष  हिंदी है  तो पहचान  है, हिंदी है तो स्वाभिमान है, हिंदी से ही जुड़ा जन–जन, हिंदी ही भारत की शान है। हिंदी है तो जीवन आसान है, हिंदी से ही हमारा सम्मान है, मातृभाषा, मातृभूमि-सी पावन, हिंदी भारत की पहचान है। हिंदी में ही संस्कार बसते हैं, हिंदी में ही विचार बसते हैं, जन-जन की आशा है हिंदी,  हिंदी में ही सद्भाव बसते हैं। हिंदी से ही साहित्य सृजन होता है, हिंदी से ही संस्कृति सृजन होता है, युगों-युगों तक बोलेगा इतिहास हिंदी का,  हिंदी से ही नव भारत का सृजन होता है।

विश्व हिन्दी दिवस पर विशेष 10 जनवरी 2026

विश्व हिन्दी दिवस 2026 : संदेश हिन्दी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक चेतना, राष्ट्रीय अस्मिता और वैश्विक संवाद की सशक्त सेतु है। विश्व हिन्दी दिवस 2026 के पावन अवसर पर, विश्व जनचेतना ट्रस्ट भारत के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के रूप में मैं समस्त देशवासियों एवं हिन्दी-प्रेमियों को हार्दिक शुभकामनाएँ प्रेषित करता हूँ। हिन्दी वह भाषा है जो लोक से लोक तक, जन-जन की भावना से जुड़कर विचार, संवेदना और संस्कार का संचार करती है। आज जब विश्व एक वैश्विक ग्राम बन चुका है, ऐसे समय में हिन्दी ने अपनी सरलता, समृद्ध साहित्यिक परंपरा और भावनात्मक गहराई के कारण अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई है। विश्व जनचेतना ट्रस्ट भारत की प्रस्तावना के अनुरूप हमारा विश्वास है कि— भाषा, साहित्य और संस्कृति किसी भी समाज की चेतना का मूल आधार होते हैं। इसी चेतना को जाग्रत करना, साहित्यकारों, रचनाकारों, युवाओं और समाज के हर वर्ग को हिन्दी से जोड़ना तथा मानवीय मूल्यों, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक राष्ट्रबोध को सुदृढ़ करना हमारे संगठन का प्रमुख उद्देश्य है। ट्रस्ट निरंतर हिन्दी भाषा के प्रचार-प्रसार, ...