सफलता की पुकार
सफलता की पुकार सफल वो हैं, सफल हम हैं, सफलता कह रही हमसे ! गगन सी ऊँचाई पर भी, फूल खिल ही जाते हैं। कठिन हो राह जितनी भी, सहारे मिल ही जाते हैं। लगन, श्रद्धा, परिश्रम से, सफलता पा ही जाते हैं । कभी ऊपर, कभी नीचे, यही प्रेरक सिखाते हैं। अंधेरी रात गहरी हो, सवेरा आ ही जाता है। मनुज सागर-सी मुश्किल में, किनारा पा ही जाता है। अगर हो लक्ष्य निर्धारण, प्रकृति सम्मान करती है। नीयत हो आपकी सच्ची, तो दुनिया गान करती है। सफलता की कहानी ही, तेरा यशगान करती है। जो थककर हारता ना हो, उसी का मान करती है। जो खाकर ठोकरें मानुष, उठकर फिर से चलता है। सतत अभ्यास ही सच्ची, जीवन की सफलता है। सफल वो हैं, सफल हम हैं, सफलता कह रही हमसे ! © डॉ. राहुल शुक्ल 'साहिल'